00:00
03:49
पानी पऱ्यो सरर, छाना बज्यो गरर
मनमा उठ्यो आज मेरो आनन्दको लहर
हिजोको बिपना आज भएछ सपना
ए कान्छी, कति चाँडै बितेको यो जीवन
पानी पऱ्यो सरर, भिज्यो कालेबुङ सहर
कालो-कालो बादल चढी फर्की आयो असार, लहै
♪
♪
जिन्दगी कहिले घाम कहिले पानी, लैबरी लै
माया नै सबैभन्दा ठूलो कुरो रैछ नि है
चारैतिर निला-निला आकाश नै छायो है
वरिपरि लागेको यो कुइरो हरायो है
मनलाई साँचो राखी हिँडिँरहेछु
म तिम्रो साहारामै बाँचिरहेछु, मायालु
♪
पानी पऱ्यो सरर, झोडा बग्याे गरर
फर्की आएँ तिम्रैतिर छाडी सारा संसार
हिजोको बिपना आज भएछ सपना
ए कान्छी, कति चाँडै बितेकाे याे जीवन
पानी पऱ्यो सरर, भिज्याे कालेबुङ सहर
कालाे-कालाे बादल चढी फर्की आयाे असार
♪
लैबरी, लैबरी, लैबरी लै, ओ नानी, लैबरी, लैबरी लै
लैबरी, लैबरी, लैबरी लै, ओ नानी, लैबरी, लैबरी लै
लैबरी, लैबरी, लैबरी लै, ओ नानी, लैबरी, लैबरी लै
लैबरी, लैबरी, लैबरी लै, ओ नानी, लैबरी, लैबरी लै
लैबरी, लैबरी, लैबरी लै, ओ नानी, लैबरी, लैबरी लै
लैबरी, लैबरी, लैबरी लै, ओ नानी, लैबरी, लैबरी लै